बाढ़ में बैलगाड़ी से गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल, बेटे को दिया जन्म – पुल न होने से फिर खुली व्यवस्था की पोल
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MIRROR NEWS। बोड़ रैयत गांव की एक गर्भवती महिला को रविवार को उस समय जान जोखिम में डालकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा, जब प्रसव पीड़ा के दौरान गांव से लगे भाजी नदी का तेज बहाव रास्ता रोक चुका था। गांव में नदी पर अब तक पुल नहीं बना है, जिससे बारिश के दिनों में आवागमन बाधित हो जाता है। गर्भवती महिला सुनीता उईके को गांव वालों ने बैलगाड़ी की मदद से नदी पार कराकर किसी तरह चिरापाटला अस्पताल पहुंचाया।
वहां सुरक्षित प्रसव हुआ और सुनीता ने एक बेटे को जन्म दिया। लेकिन इस दौरान उसकी सास रामवती उईके भी बहाव में बहने से बाल-बाल बचीं। इस घटना का वीडियो सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामला बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी तक पहुंचा। कलेक्टर ने कहा कि नदी पर पुल निर्माण के प्रस्ताव को दोबारा भेजा जाएगा।
सालों से अधूरी है पुल की मांग
भाजी नदी पर पुल निर्माण की मांग कई वर्षों से चल रही है, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। गांववासियों के अनुसार, ‘जयस’ संगठन दो बार प्रदर्शन कर चुका है, और ग्रामीण भी कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं। पूर्व कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस ने भी पुल निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन कार्य आगे नहीं बढ़ पाया।
पहले भी ले चुकी है जान
यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले वर्ष गांव के उपसरपंच की इसी नदी में डूबकर मौत हो गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के समय यहां से निकलना किसी खतरे से कम नहीं होता।
अब अल्टीमेटम
श्रमिक आदिवासी संगठन के राजेंद्र गढ़वाल ने चेतावनी दी है कि यदि 15 अगस्त तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो गांव में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
हमने कई बार मांगा पुल, हर बार मिला सिर्फ आश्वासन। अब हमारी जान की कीमत समझो!
– रामवती उईके, पीड़िता की सास
