पिकनिक या मौत का सफर? बैतूल के झरनों में हर साल दोहराता खतरा, इस बार 16 साल का पीयूष बना शिकार

खेड़ी गांव के पास कन्हैया कोल झरने में घटा दर्दनाक हादसा। सेल्फी लेते वक्त फिसला किशोर, अब तक लापता।

BETUL MIRROR NEWS। झरनों की खूबसूरती और ठंडे पानी की चाहत युवाओं को पिकनिक के लिए आकर्षित करती है, लेकिन हर साल ये सुंदर स्थान किसी न किसी परिवार के लिए मातम का कारण बन जाते हैं। रविवार को ऐसी ही एक घटना में 16 वर्षीय पीयूष परिहार की जान पर बन आई। भवानी मोहल्ला निवासी पीयूष अपने पांच दोस्तों के साथ खेड़ी गांव से 1 किमी दूर कन्हैया कोल झरने पर पिकनिक मनाने गया था।

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नहाने के बाद वह ऊपरी हिस्से में चट्टानों पर चढ़कर सेल्फी ले रहा था, तभी उसका पैर फिसला और वह सीधे झरने के गहरे पानी में जा गिरा। दोस्तों ने मचाया शोर, लेकिन कोई मदद नहीं मिल सकी घटना के समय साथ गए दोस्तों ने शोर मचाया, मदद की कोशिश की, लेकिन पीयूष पानी में समा चुका था। पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन झरने के बहाव और गहराई के कारण अब तक उसका शव नहीं मिल सका है।

कन्हैया कोल झरना—जहां हर साल पिकनिक के दौरान हादसे हो रहे हैं, लेकिन कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं।

सवाल जो अब उठने चाहिए…

🔹 क्या झरनों पर सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं किए जा सकते?
🔹 चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड क्यों नहीं लगाए जाते?
🔹 हादसों के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?

 ग्रामीणों का दर्द और चेतावनी

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पहला हादसा नहीं है। “हर साल कोई न कोई जान गंवाता है। प्रशासन सिर्फ घटनाओं के बाद आता है।” उन्होंने झरनों को सुरक्षित बनाने और खतरनाक हिस्सों को आमजन के लिए बंद करने की मांग की है।

 सावधान रहें, सजग रहें!

पिकनिक स्थलों पर जाने से पहले सुरक्षा का ध्यान रखें। झरनों, बांधों और अनदेखे प्राकृतिक स्थलों पर सेल्फी और एडवेंचर करने से बचें। एक लम्हे की लापरवाही जीवनभर का दुख बन सकती है।

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