शासकीय भूमि पर अतिक्रमण मामले में तहसीलदार ने तीन ग्रामीणों पर ठोका जुर्माना
छिपन्या पिपरिया में 17 हेक्टेयर सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के आदेश
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MIRROR NEWS/ ग्राम छिपन्या पिपरिया की शासकीय भूमि पर लंबे समय से हो रहे अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए 3 ग्रामीणों पर कुल 40 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही 7 दिवस के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए हैं, अन्यथा शासकीय व्यय पर कब्जा हटाया जाएगा और उसकी राशि भू-राजस्व की भांति वसूली जाएगी। यह कार्यवाही तहसीलदार आमला द्वारा की गई है। गौरतलब है कि विगत दिनों किसान संघर्ष समिति सहित ग्राम छिपन्या पिपरिया के अन्य ग्रामीणों ने जनसुनवाई में आमला तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। इसमें कुल 7 लोगों के नाम बताए गए थे, जिन पर आरोप था कि उन्होंने जानबूझकर बीते 4-5 वर्षों से शासकीय भूमि पर कब्जा कर गन्ना और मक्का जैसी फसलें बो दी हैं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद हल्का पटवारी द्वारा जांच प्रतिवेदन तैयार कर तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किया गया।
7 दिन में अतिक्रमण हटाने के आदेश
प्राप्त आदेश-पत्र के अनुसार ग्राम छिपन्या पिपरिया स्थित खसरा नंबर 115 रकबा 3.904 हेक्टेयर और खसरा नंबर 114 रकबा 0.142 हेक्टेयर की शासकीय भूमि पर अनावेदक संपत पिता प्रतापसिंह, विक्रम पिता संपत और महाराज पिता आनंदसिंह ने अतिक्रमण कर गन्ना एवं मक्का बोया था। मामले की सुनवाई के बाद तीनों को दोषी पाया गया और म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के अंतर्गत कार्रवाई की गई। तहसीलदार ने संपत पिता प्रतापसिंह पर 10 हजार रुपए, विक्रम पिता संपत और महाराज पिता आनंदसिंह पर एक एक हजार रुपए अर्थदण्ड लगाया है। साथ ही सभी से कहा गया है कि वे 7 दिन में स्वयं अतिक्रमण हटाकर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। अन्यथा प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाया जाएगा और उसका खर्च भी आरोपितों से वसूला जाएगा।
किसान संघर्ष समिति आमला ने उठाया था मुद्दा
इसके अलावा, ग्राम छिपन्या पिपरिया की शासकीय भूमि खसरा नंबर 28, रकबा 13.083 हेक्टेयर (छोटे झाड़ का जंगल मद) पर भी संपत पिता प्रतापसिंह द्वारा अवैध रूप से गन्ना और मक्का बोने का मामला सामने आया है। इस पर भी तहसील कार्यालय ने कार्रवाई करते हुए 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है और बेदखली के आदेश जारी किए हैं। यह पूरा मामला किसान संघर्ष समिति आमला द्वारा बार-बार ज्ञापन देकर उठाया गया था। समिति के लगातार प्रयासों और ग्रामीणों की शिकायतों के बाद प्रशासन ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। अब पटवारी को 7 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
