बोड़ी में विश्व आदिवासी दिवस पर लिया संकल्प – नशा छोड़ेंगे, कुरीतियां खत्म करेंगे

कोरकू समाज ने ग्राम बोड़ी में रैली व सांस्कृतिक कार्यक्रम से मनाया विश्व आदिवासी दिवस

A pledge was taken on World Tribal Day in Bori – we will give up addiction and end evil practices विश्व आदिवासी दिवस पर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित बोड़ी गांव में कोरकू आदिवासी समाज ने पारम्परिक पूजा-अर्चना और रैली के साथ संस्कृति का रंग बिखेरा।

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जल-जंगल-जमीन के जयकारों से गूंजते माहौल में समाज ने बच्चों को शिक्षित करने, नशे से दूर रहने और कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प लिया। पारम्परिक ढोल, थापटी और गडली-सुसुन की लय पर थिरकते कदमों ने उत्सव को और खास बना दिया। अंत में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान भी किया गया।

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आदिवासी समाज द्वारा पारम्परिक रीति-रिवाज और संस्कृति के साथ रैली एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। आदिवासी कोरकू उन्नतिशील समाज एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी जिला बैतूल मध्यप्रदेश के तत्वाधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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रैली की शुरुआत कोरकू आदिवासी समाज के कुल देवता काला-मुठवा, हरदोली-माय, खेड़ापति, माता-माय, दरवाजा गोमेज (लंगड़ा गोमेज), तीर गोमेज, बुन्दो माय, फोटक गोमेज, राणा गोमेज, नीलगढ़ गोमेज, बारालिंग गोमेज, चोला गोमेज, मठार गोमेज, खर्रा गोमेज, डोकरी माय, खोकली माय आदि देवी-देवताओं के खोटा पूजन से की गई। पूजन समाज के पडियार द्वारा किया गया।

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रैली के दौरान जल, जंगल, जमीन के जय-जौहार के नारे गूंजते रहे, जिससे बोड़ी गाँव और आसपास का प्राकृतिक वातावरण उत्साह से भर गया।

कुटकी के दाने रखकर परिवारों को किया आमंत्रित

इस कार्यक्रम की तैयारी के लिए कोरकू आदिवासी उन्नतिशील समाज संगठन के बोड़ी चावड़ी एवं विकासखण्ड बैतूल के युवा पदाधिकारियों ने घर-घर जाकर पारम्परिक रिवाज के अनुसार कुटकी के दाने रखकर परिवारों को आमंत्रित किया। इस अनोखी पहल से प्रभावित होकर गाँव के बड़े-बुजुर्गों और महिलाओं ने 9 अगस्त को खेती-बाड़ी का कार्य बंद रखकर विश्व आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया। यह दिवस आदिवासियों की मूल पहचान, अस्मिता और समाज के विकास पर विचार-विमर्श का महापर्व माना जाता है। रैली में कोरकू आदिवासी समाज के युवक-युवतियां, बच्चे और बुजुर्ग पारम्परिक वेशभूषा में सज-धजकर ढोल, मान्दल, थापटी और चिटकोरा जैसे वाद्ययंत्रों की थाप पर गडली-सुसुन करते हुए शामिल हुए। पूरे गाँव में उत्सव जैसा माहौल था और वातावरण खुशियों से सराबोर हो गया। रैली का समापन बोड़ी गाँव के मुठवाधाम में हुआ, जहां मुठवा एवं अन्य देवी-देवताओं की विनती/प्रार्थना की गई। इसके बाद भगवान बिरसा मुण्डा, वीरांगना रमको कासादा, भगवान महानायक सरदार गंजन सिलू सिन्ज कोरकू, भगवान वीर शहीद रामजी भाउ कोरकू, भगवान टन्टू जामू सिन्ज, भगवान लाखाजी, विद्या की देवी माँ सरस्वती और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

 

समाज की कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प

अतिथियों का स्वागत कुटकी का तिलक लगाकर और सफेद गमछा भेंटकर किया गया। मंच पर मुख्य अतिथि कोरकू आदिवासी रीति-रिवाज एवं संस्कृति प्रचारक मालिक खुशराज भूरी-भाकलू ढिकू सिन्ज रूमा-कोरकू आदिवासी, जिला उपाध्यक्ष गोलू कलमे, अध्यक्ष विकासखण्ड चावड़ी बैतूल संदीप फेण्ड्रा, सचिव विकासखण्ड चावड़ी बैतूल गजानंद टाण्डिल, अध्यक्ष ग्राम चावड़ी बोड़ी फत्तुलाल अखण्डे, सचिव ग्राम चावड़ी बोड़ी संजय कासादा, संरक्षक ग्राम चावड़ी बोड़ी राजू अखण्डे, संरक्षक ग्राम चावड़ी बोड़ी विजय भुसुम, बेली सिलू सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु उपस्थित रहे।अतिथियों ने अपने उद्बोधन में बच्चों को शिक्षित करने, अपने माता-पिता और बुजुर्गों का प्रतिदिन चरण स्पर्श करने, अपने पितरों के नाम पर पौधारोपण करने, प्रत्येक घर के सामने दो पेड़ एक अपनी गोत्र का और दूसरा सालई का लगाने, मरघट/श्मशान में पितरों के पैर की ओर सालई या मुहिन का पेड़ लगाने, नशे से दूर रहने और समाज की कुरीतियों को समाप्त करने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम के अंत में समाज के प्रतिभाशाली छात्रों का सम्मान भी किया गया।

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