तालाब की अनुमति के लिए किसान ने पालतू भैंस बेचकर दी रिश्वत
मनरेगा के तहत बनने वाले तालाब में मजदूरी, सामग्री और बिल के नाम पर फर्जीवाड़ा का लगाया आरोप
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The farmer sold his pet buffalo to bribe him for permission to build a pond रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की एक चौंकाने वाली कहानी आठनेर ब्लॉक के ग्राम देहगुड़ से सामने आई है, जहां एक मजबूर किसान ने तालाब निर्माण की अनुमति के लिए अपनी पालतू भैंस बेचकर पहले 10 हजार रुपये दिए, फिर भी गांव के सहायक सचिव, सरपंच और पंच ने उससे 25 हजार रुपये की मांग कर दी।
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पैसे न देने पर खेती बर्बाद करने की धमकी दी गई, वहीं मनरेगा के तहत बनने वाले तालाब में मजदूरी, सामग्री और बिल के नाम पर खुलेआम फर्जीवाड़ा कर सरकारी राशि हड़पने का आरोप भी लगा है। यह सनसनीखेज़ मामला अब जनसुनवाई में पहुंच चुका है।
पीड़ित किसान पंचम बारपेटे 60 वर्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है कि तालाब निर्माण की अनुमति के लिए गांव के सहायक सचिव, पंच और सरपंच ने उनसे पहले दस हजार रुपये रिश्वत मांगी, जो उन्होंने जून 2025 में नगद दी।
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राशि जुटाने के लिए उन्होंने अपनी पालतू भैंस 30 हजार रुपये में बेची। बाद में की बिक्री की जानकारी मिलने पर उन्होंने कुल 25 हजार रुपये की मांग की और साफ कहा कि यदि यह राशि नहीं दी गई तो तालाब का काम और अनुमति उनके हस्ताक्षर के बिना नहीं होगी, जिससे उनकी खेती प्रभावित होगी और वे भूखे मर जाएंगे।
शिकायत में पंचम बारपेटे ने यह भी कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामवासियों को तालाब निर्माण में मजदूरी का कार्य न देकर अपने मनपसंद मजदूर लगाए और फर्जी बिल लगाकर शासन से राशि गबन कर ली।
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उन्होंने बताया कि तालाब निर्माण में उन्होंने ग्राम के नरेश झाड़े का ट्रैक्टर लगाकर स्वयं पत्थर डलवाए, लेकिन उसका बिल भी अनावेदकों ने अपने नाम पर फर्जी रूप से प्रस्तुत किया। पंचम बारपेटे ने कहा कि ट्रैक्टर की मजदूरी और पत्थर उनकी ओर से दिए गए थे, फिर भी उसका भुगतान और बिल में हेराफेरी कर ली गई।
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आवेदक ने जनसुनवाई में मांग की है कि सहायक सचिव राजेश झाड़े, पंच परसराम बारस्कर और सरपंच राधिका बारस्कर के खिलाफ तालाब निर्माण में फर्जी बिल प्रस्तुत करने, मनरेगा मजदूरी में गड़बड़ी करने और रिश्वत लेने के आरोपों पर विस्तृत जांच की जाए तथा कानूनी कार्रवाई की जाए।
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